आपको घर खरीदने के लिए लोन चाहिए। ऐसे में सबसे पहले बैंक याद आता है। आज अपने यहां कई देसी और विदेशी बैं
क मौजूद हैं, जो हमारे सपनों को सच करने के लिए तैयार हैं। यहां सवाल उठता है कि कोई बैंक हमें कितना लोन दे सकता है और इसका आधार क्या होता है?
आपको होम लोन के लिए कितनी रकम मिलेगी, यह फैसला लोन चुकाने की आपकी क्षमता पर निर्भर करता है। इस क्षमता का निर्धारण बैंक अपने पैमाने पर करता है। इसमें आपकी कमाई, उम्र, योग्यता, अनुभव, आपके बिज़नस, आपकी नौकरी, अब तक कितनी संपत्ति अर्जित की है, इनकम का कोई दूसरा स्त्रोत भी है, आपने अन्य लोन तो नहीं लिया हुआ है और निवेश कहां-कहां किया है? इन सभी बातों को देखा जाता है। इसके बाद ही बैंक आपके लोन की राशि तय करता है। वैसे, आपको कितने रुपये तक मिल सकते हैं, इसे निर्धारित करने में नीचे लिखे तीन फैक्टर ही सबसे अहम रहते हैं :
इंस्टॉलमेंट टू इनकम रेशियो
बैंक आईआईआर (इंस्टॉलमेंट टू इनकम रेशियो) देखता है। इसके तहत यह जांचा जाता है कि कस्टमर प्रतिमाह कितने रुपये चुका सकता है। सामान्यतया यह सैलरी का 50 फीसदी तक होता है। मान लीजिए, अगर आप महीने का दो लाख रुपये कमाते हैं, तो आपकी इंस्टॉलमेंट एक लाख रुपये से अधिक नहीं हो सकती।
एफओआईआर
आईआईआर के बाद फिक्स्ड ऑबलिगेशन टू इनकम रेशियो (एफओआईआर) को देखा जाता है। इसमें मुख्य रूप से कस्टमर द्वारा पूर्व में लिए गए लोन और इनके इंस्टॉलमेंट्स पर गौर किया जाता है। उसी आधार पर आपके हाउसिंग लोन का निर्धारण किया जाता है। मान लें कि आपकी सैलरी 50 हजार रुपये प्रतिमाह है और आप गाड़ी की इंस्टॉलमेंट के लिए 10 हजार रुपये और टीवी के लिए पांच हजार रुपये चुका रहे हैं। ऐसे में होम लोन के लिए इंस्टॉलमेंट की सीमा 20 हजार रुपये से अधिक नहीं हो सकती, यानी सैलरी का 40 फीसदी भाग।
कॉस्ट रेशियो
आप अगर अपनी प्रॉपर्टी पर लोन लेना चाहते हैं, तो इसके लिए भी बैंक एक खास नियम पर चलता है। बैंक देखता है कि जो व्यक्ति लोन लेना चाह रहा है, उसकी संपत्ति की मार्केट वैल्यू कितनी है? आपकी संपत्ति के कुल मूल्य का 70 से 90 फीसदी तक ही लोन के रूप में दिया जाता है।
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