क्या आप यह सोचकर परेशान हैं कि आपने शराब के नशे में किसी को गलत ई-मेल भेज दिया, जो आपको नहीं भेजना चाहिए था। ई-मेल भेजने से पहले गणित के कुछ सवालों को हल करने से आप अगले दिन 'ओह नो' कहने से बच सकते हैं। कुछ सर्विस प्रोवाइडर यूजर्स को 'थिंक बिफोर स्पीक' का ऑप्शन दे रहे हैं।
शुक्रवार की रात को आप मदहोशी के आलम में घर पहुंचते हैं। लेकिन बिस्तर पर चुपचाप सोने की जगह आप एक शरारती और आपत्तिजनक ई-मेल टाइप करते हैं और उसे अपनी पूर्व प्रेमिका को भेज देते हैं। हालत तब और बदतर हो जाती है जब आप ऐसा कोई ई-मेल अपने बॉस को भेजते हैं। यह उस समय आपको अच्छा लग सकता है, लेकिन नशा उतरने के बाद अगली सुबह आपको महसूस होता है कि आप से कुछ गलती हो गई।
इस तरह की मुश्किल स्थितियों से लोगों को बचाने के लिए सर्विस प्रोवाइडर यूजर्स को ई-मेल भेजने से पहले उन्हें डबल चेकिंग की सुविधा दे रहे हैं। ऐसा नहीं है कि केवल शराब के नशे में इस तरह के ई-मेल भेजे जाते हों। स्टूडेंट दिव्या रमन कहती हैं, 'मैं काफी जल्दी में रहती हूं। मैंने इस तरह के ई-मेल बहुत भेजे हैं, जिन्हें भेजने के बाद मुझे काफी अफसोस हुआ। हो सकता है कि जब आप ई-मेल भेजने के लिए बटन दबाएं, उस समय आपके अंदर भावनाओं का तूफान उमड़ रहा हो। डबल चेक के ऑप्शन से यूजर को एक मिनट सोचने का मौका मिल जाता है।'
लॉ स्टूडेंट संदीप मेहरा इस बात से इत्तफाक नहीं रखते कि डबल चेकिंग का ऑप्शन किसी व्यक्ति की फैसले की जांच का उचित पैमाना हो सकता है। वह सवाल करते हैं, 'अगर ई-मेल भेजने वाला व्यक्ति मैथ्स में कमजोर हुआ तो उसकी बदनामी होने में ज्यादा देर नहीं लगेगी।' एक स्टूडेंट राधा बतरा बताती हैं, 'कई बार मैं एसएमएस पर किसी खास व्यक्ति के बारे में बातें कर रही हूं और मैंने उसी व्यक्ति को ई-मेल भेज दिया, जिसकी मैं किसी दूसरे से शिकायत कर रही थी। यह ठीक है कि मैसेज भेजते समय कई बार हम ऐसी कोई बात लिख देते हैं, जो हम नहीं कहना चाहते।'
इंजीनियरिंग के स्टूडेंट रोहित एम. मानते हैं, 'उन्होंने रात को बेकार के ई-मेल भेजने और सुबह उनका पश्चाताप करने की आदत से बचने का रास्ता तलाश लिया है। अब मैं रात को कोई ई-मेल नहीं भेजता। इसकी जगह मैं सुबह का इंतजार करना ज्यादा बेहतर समझता हूं।'
वीजे साइरस साहूकार का कहना हैं, 'ई-मेल तक तो ठीक है, लेकिन यह सावधानी चैटिंग के मामले में नहीं बरती जा सकती। क्योंकि तब किसी से चैटिंग करना बोर लगने लगेगा। संदीप कहते हैं, 'लोगों को ई-मेल सर्विस प्रोवाइडर से मदद की कोई जरूरत नहीं है। क्या यह तय करना उनका काम है कि कोई किसे ई-मेल भेजना चाहता हूं और किसे नहीं। मैं किसी लड़की को यह ई-मेल भेजने से पहले कि मैं उसे छोड़ना चाहता हूं। मैथ्स के सवाल हल नहीं करना चाहता।'
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5 days ago
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