कैलेंडर में 31 दिसंबर की तारीख काफी अहम होती है। लेकिन इसकी अहमियत केवल पुराने साल के अंत और नववर्ष की शुरुआत से ही नहीं जुड़ा बल्कि प्रत्येक वेतनभोगी व्यक्ति के लिए यह वित्त वर्ष के लिए निवेश की घोषणा करने का भी अंतिम दिन होता है और वह इस समयसीमा को पूरा करने के लिए अपना पूरा प्रयास करता है। 31 दिसंबर के बाद भी कर बचाने के लिए जरूरी निवेश करने का विकल्प मौजूद होता है लेकिन इसके बाद स्रोत पर कर कटौती ( टीडीएस ) की जाती है। इस कर का रिफंड केवल रिटर्न दाखिल करने के बाद ही मिलता है जो कि एक मुश्किल प्रक्रिया हो सकती है। वर्ष की शुरुआत से ही सही योजना बनाकर आप अंतिम समय की जल्दबाजी से बच सकते हैं। हालांकि अगर किसी ने यह योजना नहीं बनाई है तो अभी भी इसके लिए समय है। कर से जुड़े निवेश करने के लिए आप निम्न सुझावों पर अमल कर सकते हैं : देरी से बचें वेतनभोगी करदाताओं को आयकर कानून की धारा 80 सी के तहत कर लाभ लेने के लिए 31 दिसंबर तक निवेश के प्रमाण के साथ घोषणापत्र भरकर जमा कराना होता है। इससे नियोक्ता को 31 मार्च को समाप्त होने वाले वित्त वर्ष के लिए अनुमानित आय की गणना करने में मदद मिलती है। इसी के आधार पर कर मासिक वेतन में से तीन किस्तों ( जनवरी , फरवरी और मार्च ) में काटा जाता है। निवेश सलाहकार फर्म द टिपिंग प्वाइंट की पार्टनर , प्रेरणा सालस्कर आप्टे का कहना है , ' शुरुआत में ही सही योजना न बनाने से अंतिम तिमाही में नकदी की समस्या हो सकती है। अंतिम समय में किए गए निवेश और कर के भुगतान से आपकी आमदनी पर भी बड़ा असर पड़ सकता है। ' ऐसी स्थिति से बचने के लिए अप्रैल से ही चरणबद्ध तरीके से निवेश किया जाना चाहिए। शुरुआत से ही निवेश करने से आप धारा 80 सी के तहत मिलने वाले कर लाभ , आपके नकदी के प्रवाह पर इसके असर और भविष्य की जरूरतों की समीक्षा कर सकते हैं। प्राइसवाटरहाउसकूपर्स के एसोसिएट डायरेक्टर , जयेश ठाकुर की सलाह है , ' अपने नकदी के प्रवाह की समीक्षा करें ओर अगले कुछ महीनों में संभावित बड़े खर्चों की सूची बनाएं। '
6 tips for smarter insurance planning
2 days ago
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