बीमा की जरूरत और जागरूकता बढ़ने के चलते इसके दायरे में आने वाले लोगों की संख्या भी काफी बढ़ी है। सुरक्षा, रिटायरमेंट के लिए बचत या फिर पूंजी जमा करने के उद्देश्य के साथ देश की कामकाजी आबादी के ठीक-ठाक हिस्से के पास आज बीमा पॉलिसी मौजूद है। बेहतर बीमा पॉलिसी के लिए कुछ बातों का ख्याल रखना जरूरी है।
जरूरत के मुताबिक लें पॉलिसी
बहुत-सी बीमा पॉलिसी लेने में समझदारी नहीं है। इससे बीमा सुरक्षा कई पॉलिसी में बंट जाती है और पॉलिसी लेने वाले को नुकसान होता है। ज्यादा पॉलिसी लेने पर आपको अधिक शुल्क भी चुकाना पड़ता है। अगर आप कुछ खास जोखिम से कवर चाहते हैं तो उन्हीं के लिए पॉलिसी लेनी चाहिए। जैसे, अगर कोई व्यक्ति काम के सिलसिले में बहुत अधिक यात्रा करता है तो वह व्यक्तिगत दुर्घटना के लिए कवर ले सकता है। यह पॉलिसी एक साल की अवधि तक के लिए भी ली जा सकती है।
नॉमिनी का चुनाव
बीमा का पहला मकसद सुरक्षा होता है। परिवार के मुखिया की मौत होने पर पॉलिसी आश्रितों को सुरक्षा देती है। इसके लिए नॉमिनी का चुनाव अहम होता है। ऐसे में बीमा पॉलिसी लेते वक्त नॉमिनी तय करने से जुड़ी सभी औपचारिकताएं पूरी करनी चाहिए। इससे नॉमिनी को पॉलिसी की रकम मिलने में आसानी होती है।
अक्सर व्यक्ति अविवाहित जीवन के दौरान खरीदी गई बीमा पॉलिसी में अपने माता-पिता या भाई-बहनों को नॉमिनी चुनता है। विवाह के बाद अगर नॉमिनी का नाम बदलना है तो इसमें देर नहीं करनी चाहिए।
खुद को सुरक्षित करें
बड़ी कंपनियां आमतौर पर अपने कर्मचारियों को बीमा सुरक्षा उपलब्ध कराती हैं। यह सुरक्षा कर्मचारी की वार्षिक कॉस्ट टू कंपनी की अधिकतम तीन गुना तक हो सकती है। कुछ कंपनियां कर्मचारियों के लिए बीमा पॉलिसी का विकल्प पेश करती हैं। आज के दौर में जब नौकरी बदलना आम हो गया है तो बीमा संबंधी सुरक्षा के लिए कंपनी पर पूरी तरह निर्भर करना ठीक नहीं है।
ऐसा हो सकता है कि कंपनी आपको जो बीमा सुरक्षा दे रही है, वह आपकी व्यक्तिगत जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त न हो। जोखिम उस समय और बढ़ जाता है जब कोई व्यक्ति एक नौकरी छोड़कर दूसरी नौकरी खोजता है। उम्र बढ़ने के साथ ही स्वास्थ्य बीमा (हेल्थ इंश्योरेंस) की जरूरत भी बढ़ जाती है। जिन लोगों को कंपनी से यह सुविधा मिलती है, वे चाहें तो रिटायरमेंट के बाद इसे खरीदने पर विचार कर सकते हैं। जिन व्यक्तियों को अपनी कंपनी से यह सुविधा हासिल नहीं है उन्हें अपने और परिवार के लिए इसे खरीदना बेहतर रहता है।
बच्चों के लिए बीमा पॉलिसी
भारत में बहुत से लोग अपने बच्चों के लिए बीमा पॉलिसी खरीदते हैं। आमतौर पर इसका उद्देश्य उनकी शिक्षा और विवाह पर आने वाले खर्च के लिए धन जुटाना होता है। अक्सर लोग यह भूल जाते हैं कि बच्चे परिवार के लिए आमदनी नहीं लाते। इसी वजह से परिवार के मुखिया को पहले अपने लिए बीमा लेने के बाद बच्चों के लिए पॉलिसी लेने के बारे में सोचना चाहिए। अभिभावक अपने निवेश को कभी भी भुनाकर बच्चों की जरूरतों के लिए धन जुटा सकते हैं।
कर्ज के साथ बीमा? न छोड़ें...
अगर आप कर्ज ले रहे हैं और कर्ज देने वाली संस्था आपको ग्रुप इंश्योरेंस के तहत बीमा सुरक्षा की पेशकश करती है तो इसे लेने में कोई हानि नहीं है। विशेष तौर पर अगर आप की आयु 45 वर्ष या इससे अधिक है तो आपके लिए यह और भी बेहतर है। जीवन के इस स्तर पर बीमा खरीदना मुश्किल हो जाता है क्योंकि आपको इसके लिए बहुत सी स्वास्थ्य जांच करवाने के साथ अधिक प्रीमियम भी देना पड़ता है।
जरूरत के मुताबिक लें पॉलिसी
8:04 AM | | 0 Comments
मदहोशी में ई-मेल, ना बाबा ना
क्या आप यह सोचकर परेशान हैं कि आपने शराब के नशे में किसी को गलत ई-मेल भेज दिया, जो आपको नहीं भेजना चाहिए था। ई-मेल भेजने से पहले गणित के कुछ सवालों को हल करने से आप अगले दिन 'ओह नो' कहने से बच सकते हैं। कुछ सर्विस प्रोवाइडर यूजर्स को 'थिंक बिफोर स्पीक' का ऑप्शन दे रहे हैं।
शुक्रवार की रात को आप मदहोशी के आलम में घर पहुंचते हैं। लेकिन बिस्तर पर चुपचाप सोने की जगह आप एक शरारती और आपत्तिजनक ई-मेल टाइप करते हैं और उसे अपनी पूर्व प्रेमिका को भेज देते हैं। हालत तब और बदतर हो जाती है जब आप ऐसा कोई ई-मेल अपने बॉस को भेजते हैं। यह उस समय आपको अच्छा लग सकता है, लेकिन नशा उतरने के बाद अगली सुबह आपको महसूस होता है कि आप से कुछ गलती हो गई।
इस तरह की मुश्किल स्थितियों से लोगों को बचाने के लिए सर्विस प्रोवाइडर यूजर्स को ई-मेल भेजने से पहले उन्हें डबल चेकिंग की सुविधा दे रहे हैं। ऐसा नहीं है कि केवल शराब के नशे में इस तरह के ई-मेल भेजे जाते हों। स्टूडेंट दिव्या रमन कहती हैं, 'मैं काफी जल्दी में रहती हूं। मैंने इस तरह के ई-मेल बहुत भेजे हैं, जिन्हें भेजने के बाद मुझे काफी अफसोस हुआ। हो सकता है कि जब आप ई-मेल भेजने के लिए बटन दबाएं, उस समय आपके अंदर भावनाओं का तूफान उमड़ रहा हो। डबल चेक के ऑप्शन से यूजर को एक मिनट सोचने का मौका मिल जाता है।'
लॉ स्टूडेंट संदीप मेहरा इस बात से इत्तफाक नहीं रखते कि डबल चेकिंग का ऑप्शन किसी व्यक्ति की फैसले की जांच का उचित पैमाना हो सकता है। वह सवाल करते हैं, 'अगर ई-मेल भेजने वाला व्यक्ति मैथ्स में कमजोर हुआ तो उसकी बदनामी होने में ज्यादा देर नहीं लगेगी।' एक स्टूडेंट राधा बतरा बताती हैं, 'कई बार मैं एसएमएस पर किसी खास व्यक्ति के बारे में बातें कर रही हूं और मैंने उसी व्यक्ति को ई-मेल भेज दिया, जिसकी मैं किसी दूसरे से शिकायत कर रही थी। यह ठीक है कि मैसेज भेजते समय कई बार हम ऐसी कोई बात लिख देते हैं, जो हम नहीं कहना चाहते।'
इंजीनियरिंग के स्टूडेंट रोहित एम. मानते हैं, 'उन्होंने रात को बेकार के ई-मेल भेजने और सुबह उनका पश्चाताप करने की आदत से बचने का रास्ता तलाश लिया है। अब मैं रात को कोई ई-मेल नहीं भेजता। इसकी जगह मैं सुबह का इंतजार करना ज्यादा बेहतर समझता हूं।'
वीजे साइरस साहूकार का कहना हैं, 'ई-मेल तक तो ठीक है, लेकिन यह सावधानी चैटिंग के मामले में नहीं बरती जा सकती। क्योंकि तब किसी से चैटिंग करना बोर लगने लगेगा। संदीप कहते हैं, 'लोगों को ई-मेल सर्विस प्रोवाइडर से मदद की कोई जरूरत नहीं है। क्या यह तय करना उनका काम है कि कोई किसे ई-मेल भेजना चाहता हूं और किसे नहीं। मैं किसी लड़की को यह ई-मेल भेजने से पहले कि मैं उसे छोड़ना चाहता हूं। मैथ्स के सवाल हल नहीं करना चाहता।'
8:05 AM | | 0 Comments
ब्लॉग बना लिया है , पर उसका पता दूसरों को कैसे चलेगा
आज हम ब्लॉग से जुड़े कुछ ऐसे पहलुओं की चर्चा करने जा रहे हैं , जिनको लेकर मुमकिन है आपके मन में भी सवाल उठता होगा। मसलन , आपने ब्लॉग बना लिया है , पर उसका पता दूसरों को कैसे चलेगा ? लोग आपके ब्लॉग पर कैसे आएंगे ? आपने कुछ नया लिखा , इसकी जानकारी दूसरों तक कैसे पहुंचेगी ? उसी तरह , आपको दूसरों के बारे में भी कैसे पता चलेगा कि उन्होंने आज क्या लिखा ? आपकी इस समस्या को दूर करते हैं एग्रिगेटर। एग्रिगेटर वह है जो आपके ब्लॉग को प्रमोट करने का काम करता है। यानी एक ऐसा मंच जिसके पास तमाम सूचनाएं रहती हैं कि किसने क्या लिखा। वह इन सूचनाओं को हम सब के लिए अपनी वेबसाइट पर एक साथ रख देता है। आप ऐसी ही वेबसाइटों के जरिए दूसरों तक पहुंच सकते हैं और दूसरे आप तक।
हिंदी ब्लॉग्स को प्रमोट करने वाली ऐसी तीन प्रमुख वेबसाइटें हैं - http://blogvani.com /, http://chitthajagat.in / और http://narad.akshargram.com /
ऐसी वेबसाइट को एग्रिगेटर कहते हैं और इनके द्वारा प्रमोट होने वाले ब्लॉग के संचालकों को मॉडरेटर। अगर आपका अपना कोई ब्लॉग है तो आप उसके मॉडरेटर कहे जाएंगे।
एग्रिगेटर आपके ब्लॉग के RSS ( रियली सिंपल सिंडिकेशन ) FEED से पता लगाते हैं कि उस पर कुछ नया लिखा गया है या नहीं। यह RSS FEED वेब फीड फॉर्मेट का ही एक हिस्सा होता है। किसी भी ब्लॉग या वेबसाइट का RSS उसके कंटेंट को एक स्टैंडराइज्ड फॉर्मेट में एक जगह फ्रिक्वेंटली अपडेट करता जाता है। अब जो भी आपकी वेबसाइट या आपके ब्लॉग के RSS FEED को सब्सक्राइब करता है , उसे आपके द्वारा अपडेट किए गए कंटेट की जानकारी इसी के जरिए मिल जाती है।
एग्रिगेटरों के पास ऐसी प्रोग्रामिंग होती है जो हर पल आपके RSS FEED पर नजर रखे रहती है। जैसे ही उसे किसी अपडेट की जानकारी मिलती है , वह उसकी सूचना एग्रिगेटर को दे देती है और एग्रिगेटर आपकी उस अपडेट की जानकारी अपनी वेबसाइट पर दे देता है और पाठक आपके ब्लॉग तक पहुंचने लगते हैं। तो इस तरह कोई पाठक आपके ब्लॉग तक एग्रिगेटर के जरिए ही पहुंचता है। पर एग्रिगेटरों को कैसे पता चले आपके ब्लॉग का।
यह ठीक वैसे ही होता है जैसे आपको आपके पड़ोसी की कोई सूचना मिल जाती है यानी बातों - बातों से। पर इसमें कई बार सूचना पहुंचने में वक्त ज्यादा लग जाता है , इसलिए बेहतर होगा कि एग्रिगेटरों तक अपने ब्लॉग की सूचना आप खुद पहुंचाएं। इस RSS FEED का एक और कमाल देखें। आपने शायद गौर किया होगा कि इन दिनों कुछ ब्लॉगरों ने अपने ब्लॉग पर दूसरों के ब्लॉग के जो लिंक दे रखे हैं , वहां उस लिंक के नीचे उस ब्लॉग का लास्ट अपडेट दिख रहा है। यानी , अप्रत्यक्ष तौर पर वह मॉडरेटर भी एग्रिगेटर की भूमिका निभा रहा है। जाहिर है ब्लॉग स्पॉट ने लिंक देने की यह जो नई सुविधा दी है , उसकी HTML कोडिंग में RSS FEED का भी उसने इस्तेमाल किया है। इसका एक फायदा ब्लॉगरों को यह हो रहा है कि उन्होंने अपने ब्लॉग पर अपनी जिन मनपसंद ब्लॉगों का लिंक लगाया है , वहां कोई नई पोस्ट है या नहीं इसका पता उन्हें अपने ब्लॉग पर ही चल जा रहा है। मजेदार यह कि आपके किसी ब्लॉगर साथी ने अपने ब्लॉग को अगर काफी दिनों से अपडेट नहीं किया है , तो आप अपने ब्लॉग पर उनकी पंचलाइन ऐसी लगाएं कि उन्हें बाध्य होकर अपने ब्लॉग को अपडेट करना पड़ जाए। मसलन , एक ब्लॉग है biharibabukahin.blogspot.com . इसके मॉडरेटर हैं प्रियरंजन झा। इन्होंने अपने ब्लॉग पर तकरीबन तीन महीने से कुछ भी नहीं लिखा था। इनके एक साथी ने अपने ब्लॉग पर उसकी पंचलाइन कर दी ' बिहारी बाबू चुप्पी साधिन ' । नतीजा हुआ कि बिहारी बाबू ने चुप्पी तोड़ ली और एक नई पोस्ट उनके ब्लॉग पर आ गई। ऐसा ही एक और ब्लॉग है bedakhalidiary.blogspot.com. . जो अपने तेवर की वजह से शुरुआती दिनों में खूब चर्चित रहा। इसकी मॉडरेटर हैं मनीषा पांडेय। पर लास्ट पोस्ट पांच महीने पहले लिखी गई है। बिहारी बाबू वाली स्थिति इनकी भी है , पंचलाइन बनाई गई है ' इन दिनों डायरी से बेदखल ' ।
इस क्रम में अगर ' नोटपैड ' की चर्चा न हो तो बात थोड़ी अधूरी लगेगी। ब्लॉग का URL (Uniform Resource Locator) है bakalamkhud.blogspot.com मॉडरेटर हैं सुजाता। आखिरी पोस्ट महीने भर पहले की है। पंचलाइन बनी है ' नोटपैड से मिटते अक्षर। ' आइए , अब देखें यह लिंक हम अपने ब्लॉग पर कैसे लगा सकते हैं। इसके लिए आपको अपने ब्लॉग के लेआउट में जाना होगा। जाहिर है इसके लिए आपको साइन इन करनी पड़ेगी। उम्मीद है आप साइन इन करने के बाद लेआउट वाले पेज पर पहुंच गए होंगे। इस पेज पर आपको Add a Gadget का बटन दिखेगा उस पर क्लिक करने से उसका एक छोटा विंडो खुलेगा। इस विंडो में पहला ऑप्शन Blog List New है। इस पर क्लिक करते ही यह विंडो Configure Blog List के विंडो में कन्वर्ट हो जाता है। इस विंडो के ADD TO LIST वाले वाले बटन पर माउस से सिंगल क्लिक करें। उसी में एक और छोटा विंडो खुलेगा , जिस पर लिखा रहता है ' एड टु योर ब्लॉग लिस्ट ' । इसके Add by URL वाले खाने में उस ब्लॉग का URL लिख दें , जिसका लिंक आप अपने ब्लॉग पर लगाना चाहते हैं । फिर ADD बटन पर क्लिक करें। यह छोटा विंडो खुद - ब - खुद बंद हो जाएगा। और सामने रह जाएगा Configure Blog List वाला विंडो। अब इस विंडों में जहां अब तक ' नो आइटम येट ' लिखा दिख रहा था , वहां उस ब्लॉग का नाम आ चुका होगा जिसका URL अभी आपने जोड़ा। आप चाहें तो इस नाम की जगह आप अपनी पसंद की पंचलाइन लगा सकते हैं। इसी प्रोसेस से आप अपने मनपसंद ब्लॉग का एग्रिगेटर भी बन सकते हैं और अपनी पंचलाइन से सोए हुए साथियों को जगाने का बीड़ा भी उठा सकते हैं। अरे भाई , सो गए क्या इतनी लंबी बातें सुनकर। जाग जाएं और लिंक लगाने की इस नई सुविधा का मजा लें।
12:07 PM | Labels: Hindi Blog, Tips | 3 Comments
आप अपनी उन सामग्रियों को भी यूनिकोड फॉन्ट में कन्वर्ट कर सकते हैं, जो फिलहाल यूनिकोड में नहीं हैं।
मुमकिन है, हममें से कई साथियों को यह नहीं पता होगा कि यह यूनिकोड है क्या ? दरअसल, यूनिकोड किसी भी फॉन्ट का मानक है। इसे आप ऐसे भी समझ सकते हैं कि पहले विंडोज में टाइप वन (पीएस फॉन्ट) और ट्रू टाइप फॉन्ट होते थे। इनका इस्तेमाल अब भी हो रहा है, पर अब जो लेटेस्ट फॉन्ट है वह है यूनिकोड। इस यूनिकोड में हर लिपि का एक कोड पेज है, जिसकी वजह से यह फॉन्ट अब आपकी उस लिपि को आसानी से पढ़ लेता है जिसमें आप कुछ भी लिखते हैं।
अब तक कई फॉन्ट ऐसे बन चुके हैं जो यूनिकोडेड हैं। पर सबसे ज्यादा लोकप्रिय है मंगल। इसकी लोकप्रियता की एक वजह यह भी है कि यह अब विंडोज के साथ ही आने लगा है। यानी, आपने विंडोज एक्सपी या उसके बाद का वर्जन लोड किया नहीं कि खुद-ब-खुद मंगल भी आ धमकेगा आपके पीसी में। यह मानक अभी हाल के पांच-सात साल पहले तय हुआ है और चूंकि कृति देव फॉन्ट इस मानक के पहले ही बन चुका था, इसलिए वह यूनिकोड की क्राइटेरिया को पूरा नहीं कर पाता। पर हां, आप ऐसे कई फॉन्ट- जो यूनिकोडेड नहीं है- को भी यूनिकोड में कन्वर्ट कर सकते हैं। गूगल ग्रुप्स ने इस दिशा में भी बढ़िया काम किया है। उसने कई तरह के फॉन्ट का कन्वर्टर तैयार कर लिया है। गूगल के अलावा भी कई जगहों पर फॉन्ट कन्वर्टर उपलब्ध हैं।
कुछ लिंक आपके लिए यहां दिए जा रहे हैं। इसका इस्तेमाल कर आप अपनी उन सामग्रियों को भी यूनिकोड फॉन्ट में कन्वर्ट कर सकते हैं, जो फिलहाल यूनिकोड में नहीं हैं। हिंदी ब्लॉग एग्रिगेटर ब्लॉगवाणी ने भी इंडिनेटर नाम से फॉन्ट कन्वर्टर बनाया है। यहां तक पहुंचने के लिए अड्रेस बार में www.indinator.com/Converter.aspx कंपोज करें। गूगल ग्रुप्स के कनवर्टर का इस्तेमाल करने के लिए अड्रेस बार में groups.google.com/group/technical-hindi/files कंपोज करें। यहां तकरीबन 45 तरह के फॉन्ट के कन्वर्टर के लिंक हैं। आप अपनी जरूरत वाली फॉन्ट कन्वर्टर लिंक पर क्लिक करें। मसलन, आपका लेख क्रुति देव फॉन्ट में है। और आप इसे मंगल (यूनिकोड) में कन्वर्ट करना चाहते हैं, तो इसके लिए आप 21वें लिंक पर मौजूद krutidev010-to-Unicode converter06.htm लिंक पर क्लिक करें। एक नया विंडो खुलेगा। इस विंडो में जहां लिखा है Paste the text in Krutidev010 font in the box below : उसके ठीक नीचे के बॉक्स में आप अपना मैटर पेस्ट करें। फिर Convert to Unicode के बटन पर माउस से सिंगल क्लिक करें। इस बटन के नीचे बने बॉक्स में पलक झपकते ही आपका मैटर यूनिकोड में कन्वर्ट होकर आ जाएगा।
मुमकिन है कि यहां आए मैटर के अक्षर पढ़े न जा रहे हों। पर चिंता की बात नहीं। इस मैटर को यहां से कॉपी कर लें और वर्डपैड में ले जाकर पेस्ट कर दें। अब भी अक्षर नहीं पढ़े जा रहे हों तो Ctrl+A करें। ऐसा करने से आपका पूरा मैटर सलेक्ट हो जाएगा। अब आप वर्डपैड के फॉमेर्ट के ऑप्शन में जाकर फॉन्ट पर क्लिक करें और वहां मंगल फॉन्ट तलाश कर उस पर क्लिक कर दें। बस हो गया आपका काम। सारा मैटर अब आप आसानी से पढ़ सकते हैं। तो फिर अब देर किस बात की। अपनी पुरानी सामग्रियों को नया आवरण दे शुरू कीजिए अपने ब्लॉग पर दनादन पब्लिश करना।
7:01 AM | Labels: Hindi Blog, Tips, Unicode | 1 Comments
40 हज़ार का ब्लाउज़ फाड़ डाला राखी सावंत ने
ड्रामा क्वीन राखी सावंत के तमाशों में एक और कड़ी जुड़ गई है। टीवी रिऐलिटी शो 'छोटा पैकिट, बड़ा धमाका' नाम के टीवी शो में राखी सावंत जजों में से एक हैं। चूंकि यह बच्चों का शो है इसलिए राखी सावंत को सौम्य सी दिखने वाली साड़ी और कम बदन दिखाऊ चोली पहनने को दी गई। लेकिन, राखी तो राखी हैं !
राखी को लगा कि यह सिंपल ड्रेस उनकी तड़क-भड़क वाली हॉट इमेज से मेल नहीं खाएगी। शो के स्टाइलिस्ट से नाराज़ राखी ने चालीस हज़ार रुपये के ब्लाउज़ की आस्तीन फाड़ डाली और अपने डिज़ाइनर से कहा कि वह उसे हॉल्टर जैसा बना दे। और यह सारा तमाशा एपिसोड की शूटिंग शुरू होने से कुछ मिनट पहले हुआ।
शो की यूनिट में मौजूद हमारे सूत्रों ने बताया, ' राखी मानती हैं कि इंडस्ट्री में उनकी एक खास इमिज है जिसके लिए उन्हें एक्सपोज़ करते रहना चाहिए। वह कहती हैं कि गले को ढकने वाले कपड़ों में उनका दम घुटता है। एक बार अनारकली स्टाइल सलवार कमीज़ में राखी सावंत को देखकर उनके दोस्त विश्वास नहीं कर पाए थे कि वह राखी हैं। '
एक और सूत्र ने बताया, ' जब उन्हें साड़ी और ब्लाउज़ दिया गया तो उन्होंने इस बात की शिकायत की, कि यह ब्लाउज़ सेक्सी नहीं है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि अगर डिज़ाइनर इसे ठीक नहीं करता तो वह इसे खुद ही ठीक करेंगी। उन्होंने अपने डिज़ाइनर रीज़ा को ब्लाउज़ का हॉल्टर बनाने के लिए कहा। यूनिट में काम करने वाले लोग तो 40 हज़ार रुपये के ब्लाउज़ की धज्जियां उड़ते देखकर दंग रह गए।
11:14 PM | | 0 Comments
आखिर लोन कितना मिलेगा?
आपको घर खरीदने के लिए लोन चाहिए। ऐसे में सबसे पहले बैंक याद आता है। आज अपने यहां कई देसी और विदेशी बैं
क मौजूद हैं, जो हमारे सपनों को सच करने के लिए तैयार हैं। यहां सवाल उठता है कि कोई बैंक हमें कितना लोन दे सकता है और इसका आधार क्या होता है?
आपको होम लोन के लिए कितनी रकम मिलेगी, यह फैसला लोन चुकाने की आपकी क्षमता पर निर्भर करता है। इस क्षमता का निर्धारण बैंक अपने पैमाने पर करता है। इसमें आपकी कमाई, उम्र, योग्यता, अनुभव, आपके बिज़नस, आपकी नौकरी, अब तक कितनी संपत्ति अर्जित की है, इनकम का कोई दूसरा स्त्रोत भी है, आपने अन्य लोन तो नहीं लिया हुआ है और निवेश कहां-कहां किया है? इन सभी बातों को देखा जाता है। इसके बाद ही बैंक आपके लोन की राशि तय करता है। वैसे, आपको कितने रुपये तक मिल सकते हैं, इसे निर्धारित करने में नीचे लिखे तीन फैक्टर ही सबसे अहम रहते हैं :
इंस्टॉलमेंट टू इनकम रेशियो
बैंक आईआईआर (इंस्टॉलमेंट टू इनकम रेशियो) देखता है। इसके तहत यह जांचा जाता है कि कस्टमर प्रतिमाह कितने रुपये चुका सकता है। सामान्यतया यह सैलरी का 50 फीसदी तक होता है। मान लीजिए, अगर आप महीने का दो लाख रुपये कमाते हैं, तो आपकी इंस्टॉलमेंट एक लाख रुपये से अधिक नहीं हो सकती।
एफओआईआर
आईआईआर के बाद फिक्स्ड ऑबलिगेशन टू इनकम रेशियो (एफओआईआर) को देखा जाता है। इसमें मुख्य रूप से कस्टमर द्वारा पूर्व में लिए गए लोन और इनके इंस्टॉलमेंट्स पर गौर किया जाता है। उसी आधार पर आपके हाउसिंग लोन का निर्धारण किया जाता है। मान लें कि आपकी सैलरी 50 हजार रुपये प्रतिमाह है और आप गाड़ी की इंस्टॉलमेंट के लिए 10 हजार रुपये और टीवी के लिए पांच हजार रुपये चुका रहे हैं। ऐसे में होम लोन के लिए इंस्टॉलमेंट की सीमा 20 हजार रुपये से अधिक नहीं हो सकती, यानी सैलरी का 40 फीसदी भाग।
कॉस्ट रेशियो
आप अगर अपनी प्रॉपर्टी पर लोन लेना चाहते हैं, तो इसके लिए भी बैंक एक खास नियम पर चलता है। बैंक देखता है कि जो व्यक्ति लोन लेना चाह रहा है, उसकी संपत्ति की मार्केट वैल्यू कितनी है? आपकी संपत्ति के कुल मूल्य का 70 से 90 फीसदी तक ही लोन के रूप में दिया जाता है।
11:13 PM | | 0 Comments
हिंदी मीडियम स्कूल अच्छा होता है या अंग्रेजी मीडियम स्कूल
दोस्ती का आलम भी कितना दिलफरेब है।
मेरी अंग्रेजी मीडियम स्कूलों से कोई दुश्मनी नहीं है पर बात एक अच्छे स्कूल की है....किसी शहर में कोई हिंदी मीडियम स्कूल बहुत अच्छा होता है तो कहीं कोई अंग्रेजी मीडियम स्कूल। समय, स्थान और परिस्थिति के अनुसार हिंदी मीडियम और अंग्रेजी मीडियम दोनों ही अच्छे हो सकते हैँ। वैसे मेरा तमाम दोस्तो से अनुरोध है कि वो भी अपने विचार दें कि क्या अच्छा है । मैं जानना चाहता हूं कि क्या मैं वाकई में गलत हूँ। आप बताइए कि हिंदी मीडियम स्कूल अच्छा होता है या अंग्रेजी मीडियम स्कूल। और आप अपने बच्चे के लिए कैसा स्कूल चुनना चाहेंगे।
11:03 PM | Labels: Medium, Schooling | 0 Comments
सुशील गिरधर का नया हिंदी ब्लाग
आज से मैं अपना एक नया ब्लाग शुरु कर रहा हूँ। www.girdherhindi.blogspot.com नाम से यह ब्लाग अब से कुछ पल पहले इंटरनेट के जाल पे अवतार ले चुका है। सबसे पहले मैने अपना मुख्य ब्लाग www.girdher.wordpress.com बनाया था जिसे अपडेट करना अब लगभग बंद सा ही है। इस ब्लाग ने गूगल में वो शौहरत पाई कि इसका हर लेख छपने के थोडी ही देर बाद गूगल पे आ जाता था फिर मैने www.girdher.com बनाया जो हिंदी को ध्यान में रखकर ही
शुरु किया था और इसपे कई लेख लिखे भी थे मगर एक दिन अचानक टैंम्पलेट बदलते वक्त पता नहीं क्या हुआ कि सब खत्म हो गया। फिर मैने एक नए टैम्पलेट के साथ इसे फिर शुरु किया अंग्रेजी में....और फिर इसने जो किया वो आप गूगल में खोज सकते है। हालांकि विजिटर तो कम हैं मगर एडसेंस की कमाई आशानुरुप चल रही है। लेकिन इस दौड में मैं हिंदी के पाठकों से दूर हो गया। हिंदी के पाठकों से फिर से रिश्ता जोडने के लिए मैने ये नया ब्लाग शुरु किया है जो अब हिंदी में ही रहेगा। अगर आप हिंदी के शौकीन हैं तो www.girdherhindi.blogspot.com और अगर अंग्रेजी के शौकीन हैं तो www.girdher.com पढ सकते हैं।मेरा एक तीसरा ब्लाग भी है www.sheelu.wordpress.com जो थोडा कम अपडेट हो पाता है। हिंदी के प्रमुख ब्लाग रवि रतलामी, कुन्नु भाई, हाय प्रथम, भडास, हिंदी टिप्स, जीतू का पन्ना आदि का मैं नियमित पाठक हूं। उम्मीद है आज के बाद मेरे ब्लाग के भी कुछ नियमित पाठक बनेंगे । साथ ही मैं ये बता देना चाहता हूं कि मैं एक टैलीकाम इंजीनियर हूं । अगर किसी भाई की टैलीकाम, कंम्पयूटर, किसी भी हार्डवेयर या साफ्टवेयर से जुडी कोई समस्या हो तो मुझसे बेझिझक पूछिए।शेयर मार्केट, म्युचुअल फंड या बीमा और आय कर आदि की सलाह भी उपलब्ध रहेगी। एडसेंस में काफी कुछ सीख लिया है और काफी नई बातें पता चली हैं जो गूगल वाले नहीं बताते । वो भी धीरे धीरे बताता रहूंगा। खास बात ये रहेगी कि मेरे ब्लाग पे मैं वो नहीं लिखूंगा जो मेरा मन करेगा बल्कि वो लिखूंगा जो आप पढना चाहेंगे और ये तभी संभव है जब आपके विचार मुझे नियमित रूप से मिलें। तो अब बताइए कि अगली पोस्ट में क्या लिखूं।
5:53 AM | | 2 Comments